तब और अब

Location

India

तब बातें खत्म नहीं हुआ करती थी
आज बातें शुरू करने के लिए भी बहाना ढूंढ ना पड़ रहा ,

तो तब भी मेरे करीब ना था, लेकिन फिर भी तो सबसे ज्यादा करीब था,
तू आज भी तो मेरे करीब नहीं है पर क्यों आज तेरी यादें ही बस मेरे करीब है ।

शोर में भी तू समझ लेता था मेरे दिल के हाल को मेरे फोन अनकहे दरबार को, मेरी लड़खड़ाती आवाज को , तो फिर आज क्यों सन्नाटे में भी तुझे मेरी खामोशी नहीं समझ आती ।

कल भी तो तू वही था आज भी तो तू वही हूं, बस तब और अब के अंतर में ना तू वही है ना मैं वही हूं ।

This poem is about: 
Our world

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